तपेदिक
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तपेदिक या क्षयरोग या टीबी एक जानलेवा संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस नामक कीटाणु से होती है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से फेफड़ों में होता है, लेकिन यह शिरातन्त्र, लिम्फ़-तन्त्र, संचारतन्त्र, यौनतन्त्र, हड्डियों, जोड़ों और त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। दुनिया के एक-तिहाई लोगों के शरीर में इस बीमारी का कीटाणु मौजूद है और हर सेकेण्ड एक नए व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है। हर संक्रमित व्यक्ति को यह रोग नहीं होता है, लेकिन लगभग 10 प्रतिशत लोगों को सक्रिय रोग हो जाता है, जिनमें से आधे इस रोग के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं। 2004 में 1.46 करोड़ लोगों को सक्रिय तपेदिक था, 89 लाख नए रोगी सामने आए और 17 लाख मृत्यु को प्राप्त हुए, अधिकतर विकासशील देशों में। विकसित देशों में भी बहुत से लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं, जब दवाइयों, ड्रगों या एच आइ वी/एड्स की वजह से उनका प्रतिरक्षण तन्त्र कमजोर होता है। एच आइ वी संक्रमण फैलने से और तपेदिक-नियंत्रण कार्यक्रमों को ध्यान न देने की वजह से तपेदिक दुनिया में फिर उभरने लगी है। दवा-विरोधी कीटाणु काफी फैलने लगे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डाट्स कार्यक्रम से तपेदिक के फैलाव में बहुत अंतर पड़ा है।
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